October 3, 2022
एडवांस टैक्स का भुगतान चार किस्तों में किया जाता है. पहली किस्त की अंतिम तारीख 15 जून, दूसरी की 15 सितंबर, तीसरी की 15 दिसंबर और आखिरी किस्त की डेडलाइन 15 मार्च होती है. पात्र करदाताओं को टोटल टैक्स का 15 फीसदी हिस्सा 15 जून तक एडवांस टैक्स के तौर पर जमा करना पड़ता है. इसी तरह टैक्सपेयर को 15 सितंबर तक 45 फीसदी, 15 दिसंबर तक 75 फीसदी और 15 मार्च तक 100 फीसदी टैक्स भरना होता है.

इनकम टैक्स विभाग ने करदाताओं की आसानी के लिए कई प्रावधान किए हैं. एडवांस टैक्स एक ऐसा ही प्रावधान है. कोई भी करदाता, जिसकी टैक्स देनदारी 10 हजार रुपये से अधिक बनती है, उसे एडवांस टैक्स का भुगतान करना पड़ता है. इससे सरकार को भी मदद मिलती है और टैक्सपेयर्स को भी कई फायदे मिलते हैं. अगर आप भी इस कैटेगरी में आते हों तो आज की तारीख आपके लिए अहम हो जाती है. अगले असेसमेंट ईयर के लिए एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त भरने की आज अंतिम तारीख है. ऐसा नहीं कर पाने पर आपको बिना वजह पेनाल्टी भरने की जरूरत पड़ जाएगी.

टैक्सपेयर को मिलता है ये लाभ

इसे एडवांस टैक्स इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह वित्त वर्ष के पूरा होने से पहले ही चुका दिया जाता है. आमतौर पर किसी वित्त वर्ष के दौरान की गई कमाई पर साल के आखिर में इनकम टैक्स भरना पड़ता है. हालांकि करदाताओं के ऊपर एक ही बार में भारी-भरकम टैक्स का बोझ नहीं पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए एडवांस टैक्स की व्यवस्था की गई है. इसके तहत टैक्सपेयर खुद आकलन कर अपनी सुविधा के हिसाब से आने वाले असेसमेंट ईयर के लिए पहले से ही अपनी अनुमानित देनदारी के एक हिस्से का भुगतान करता है. बाद में जब इनकम टैक्स भरने का समय आए तो वह बची-खुची रकम भरकर छुटकारा पा सकता है. सरल शब्दों में कहें तो एक बार में भारी-भरकम टैक्स भरने की जगह टुकड़ों में टैक्स भरने की सुविधा को एडवांस टैक्स कहा जाता है.

एडवांस टैक्स, वह इनकम टैक्स है, जिसका भुगतान करदाता को एकसाथ न करके हर तिमाही करना होता है. आयकर एक्ट के अनुसार, करदाता को खुद ही पूरे वित्त वर्ष में होने वाली कमाई का कैलकुलेशन करना होता है. इसी कैलकुलेशन के आधार पर, विशेष अंतराल पर टैक्स का भुगतान करना होता है. यानी जिस वित्त वर्ष में आपकी कमाई हो रही है, उसी वित्त वर्ष के दौरान इनकम टैक्स चुकाया जाता है.

ऐसे लोगों के लिए एडवांस टैक्स जरूरी

ऐसा कोई भी टैक्सपेयर, जिसकी एक वित्त वर्ष में टैक्स देनदारी 10 हजार रुपये या उससे ज्यादा बनती है, उसे एडवांस टैक्स चुकाना होता है. फिर चाहे वह नौकरीपेशा हो, बिजनेस चलाता हो या फिर किसी पेशे से जुड़ा हो. सैलरीड लोगों को एडवांस टैक्स नहीं चुकाना होता है, क्योंकि कंपनी पहले से ही TDS काटकर सैलरी देती है. ऐसे करदाताओं को एडवांस टैक्स देने की जरूरत सिर्फ तब पड़ती है, जब उनकी सैलरी के अलावा कोई और इनकम हो, जैसे किराए, ब्याज या डिविडेंड से आय. आमतौर पर बिजनेसमैन या प्रोफेशनल्स एडवांस टैक्स भरते हैं. 60 साल से ऊपर के लोगों को एडवांस टैक्स भरने से छूट हासिल है, बशर्ते किसी कारोबार या प्रोफेशन से उन्हें कोई इनकम नहीं हो.

चार किस्तों में भुगतान की सुविधा

एडवांस टैक्स का भुगतान चार किस्तों में किया जाता है. पहली किस्त की अंतिम तारीख 15 जून, दूसरी की 15 सितंबर, तीसरी की 15 दिसंबर और आखिरी किस्त की डेडलाइन 15 मार्च होती है. पात्र करदाताओं को टोटल टैक्स का 15 फीसदी हिस्सा 15 जून तक एडवांस टैक्स के तौर पर जमा करना पड़ता है. इसी तरह टैक्सपेयर को 15 सितंबर तक 45 फीसदी, 15 दिसंबर तक 75 फीसदी और 15 मार्च तक 100 फीसदी टैक्स भरना होता है.

डेडलाइन हुई मिस तो लगेगी पेनाल्टी

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समय पर एडवांस टैक्स नहीं भरना टैक्सपेयर को भारी पड़ता है. समय पर टैक्स का भुगतान करने में ना रहने पर सेक्शन 234B और सेक्शन 234C के तहत ब्याज यानी इंटरेस्ट देना पड़ जाता है. मान लीजिए आपने 15 सितंबर की डेडलाइन मिस कर दी तो आपको 3 महीने का ब्याज देना होगा, जिसकी दर एक फीसदी प्रति माह है. अगर करदाता ने ज्यादा एडवांस टैक्स भर दिया है तो इनकम टैक्स रिटर्न भरकर रिफंड क्लेम कर सकता है.