October 2, 2022
प्रधानमंत्री मोदी की कप्तानी की वो खूबी, जिससे देश की राजनीति सिर्फ बीजेपी के आसपास सिमट गई
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी अकेले प्रधानमंत्री हैं जिनकी अगुवाई में लगातार केंद्र में भारी बहुमत से सरकार ने वापसी की है.

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब बीजेपी सिर्फ सात राज्यों में सत्ता में थी. आज बीजेपी देश के 17 राज्यों में सत्ता में है. इनमें से 12 राज्यों में वो अपने दम पर सत्ता में है. बाकी सात राज्यों में महाराष्ट्र में उसका उप मुख्यमंत्री है और छह राज्यों में वो छोटे सहयोगी दल की हैसियत से सत्ता में हिस्सेदार है.

1984 में लोकसभा की सिर्फ दो सीटें जीतने वाली बीजेपी ने 2019 में 303 सीटें जीतकर सत्ता में धमाकेदार वापसी की थी. उसके बाद कई राज्यों में भी उसने सत्ता विरोधी लहर को धता बताते हुए सत्ता में वापसी की. ये सब पीएम मोदी की बड़ी सोच के बड़े जादू की वजह से संभव हो पाया है.

बड़ी सोच का बड़ा जादू

अमेरिकी लेखक डॉ डेविड जे श्वार्ट्ज़ की एक किताब है द मैजिक ऑफ थिंकिंग बिग. भारत में इसका हिंदी अनुवाद बड़ी सोच का बड़ा जादू बहुत प्रसिद्ध है. इसका सार ये है कि कोई व्यक्ति न दौलत से बड़ा होता है और न अपनी हासिल की गई शिक्षा से.

वो बड़ा होता है अपनी बड़ी सोच से. जो जितना बड़ा सोचेगा, उतनी ही बड़ी कामयाबी हासिल करेगा. डॉ डेविड जे श्वार्ट्ज़ के दिए गए इस सिद्धांत को भारतीय राजनीति में पीएम मोदी ने सच साबित कर दिखाया है.

उनकी इसी बड़ी सोच के बड़े जादू का ही नतीजा है कि कभी राजनीति में अछूत समझे जाने वाली बीजेपी 2014 में 23 दलों के गठबंधन के साथ सत्ता में आई. आज भी उसके 15 सहयोगी हैं. मोदी की बड़ी सोच ने बीजेपी को देश में चौतरफा विस्तार दिया. उसे दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाया.

2012 से चलना शुरू हुआ मोदी का जादू

बीजेपी और देश की राजनीति में नरेंद्र मोदी के नाम का जादू 2012 से ही चलना शुरू हो गया था. दरअसल 2012 में बीजेपी ने गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विधानसभा का लगातार तीसरा चुनाव जीता था. उस चुनाव में मोदी ने खुद को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर दिया था.

चुनाव के दौरान बीजेपी की तरफ से कहा जाता था कि गुजरात की जनता इस बार मुख्यमंत्री नहीं बल्कि देश का अगला प्रधानमंत्री चुन रही है. इस चुनाव में जीत के बाद बीजेपी पर मोदी की छाप और इसका असर दिखना शुरू हो गया था.

2012 में बीजेपी सिर्फ पांच राज्यों हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में अपने दम पर सत्ता में थी और पंजाब में वो अकाली दल के साथ छोटे सहयोगी दल के रूप में सत्ता में हिस्सेदार थी, लेकिन इसके बाद वो पूरे देश के सियासी आसमान पर घने बादल की तरह छाती चली गई.

2014 में कैसे चला मोदी का जादू

साल 2013 में गोवा में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नरेंद्र मोदी को पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया. इस मौके पर मोदी ने पार्टी को अपने दम पर सत्ता में लाने का भरोसा दिलाया था.

तब उन्होंने लोकसभा में 272 प्लस सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था. तब पार्टी के नेताओं और चुनावी विश्लेषण को ये दूर की कौड़ी लगा था. लेकिन मोदी ने जो कहा, वो करके दिखाया. प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोषित होने के बाद उन्होंने पूरे भारत का दौरा किया. इस दौरान 3 लाख किलोमीटर की यात्रा कर पूरे देश में 437 बड़ी चुनावी रैलियां, 3-डी सभाएं व चाय पर चर्चा आदि को मिलाकर कुल 5827 कार्यक्रम किए.

चुनाव अभियान की शुरुआत उन्होंने 26 मार्च 2014 को मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद के साथ जम्मू से की और समापन मंगल पांडे की जन्मभूमि बलिया में किया. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की जनता ने एक अद्भुत चुनाव प्रचार देखा. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के चुनावों में 282 सीटों के साथ अभूतपूर्व सफलता हासिल की.

2014 के बाद कैसे देशभर में छाई बीजेपी

मोदी के पीएम बनने का बाद बीजेपी देशभर में छाती चली गई. 2013 में राजस्थान और नागालैंड जीतकर बीजेपी सात राज्यों की सत्ता पर काबिज हो चुकी थी. 2014 में मोदी के पीएम बनने के बाद बीजेपी एक के बाद एक राज्य जीत कर देशभर में चौतरफा फैलती चली गई. हालांकि बीच में कुछ राज्यों में उसे हार का मुंह भी देखना पड़ा.

लेकिन बड़ी जीत के पीछे हार छिप गईं. 2014 में हुए हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को हरा कर सत्ता हासिल की. 2016 में उसने झारखंड और मेघालय की सत्ता भी हासिल कर ली थी.

लेकिन 2017 में उस बड़ी कामयाबी मिली. इस साल उसने देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी सरकार बनाई. हालांकि वो पंजाब में सत्ता से बाहर हो गई थी, लेकिन सबसे खास बात ये रही कि गोवा और मणिपुर में उसने कांग्रेस से कम सीटें जीतने के बावजूद अपनी सरकार बनाई.

जम्मू-कश्मीर में सत्ता में हिस्सेदारी

देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य जम्मू कश्मीर में अगर बीजेपी सत्ता में शामिल हो पाई तो उसके पीछे नरेंद्र मोदी की बड़ी सोच का बड़ा जादू ही रहा. 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 28 सीटें मिली थी. वो राज्य की सबसे बड़ी पार्टी थी. बीजेपी 25 सीटें जीतकर राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इस चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस की गठबंधन सरकार को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था.

चुनाव के बाद कई हफ्तों की बातचीत के बाद 24 फरवरी 2015 को बीजेपी और पीडीपी ने राज्य में गठबंधन सरकार बनाने का फैसला किया. मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री और बीजेपी के निर्मल सिंह उपमुख्यमंत्री बने थे. तब महबूबा मुफ्ती ने कहा था सरकार सत्ता हासिल करने के लिए नहीं बल्कि दिल जीतने के लिए है. तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया. इसके बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती को पीडीपी का प्रमुख बनाया गया.

अप्रैल में महबूबा मुफ्ती बीजेपी गठबंधन से जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री बनीं. लेकिन 2018 में बीजेपी ने गठबंधन तोड़ दिया. इस गठबंधन को लेकर बीजेपी पर कई तरह के सवाल भी उठे लेकिन मोदी ने किसी की परवाह नहीं की.

2018 में झटके के बाद 2019 में बड़ी जीत
2018 में पहले कर्नाटक और फिर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार से बीजेपी को बड़ा झटका लगा. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 से बड़ी जात हासिल करके पीएम मोदी ने एक बार फिर चौंकाया. 2014 में बीजेपी ने अकेले 282 और सहयोगी दलों के साथ 336 सीटें जीती थी. वहीं 2019 में भी बीजेपी की सीटें बढ़कर 303 हो गईं और सहयोगी दलों के साथ ये आंकड़े 352 हो गया था.

भारतीय राजनीति में पिछले तीस साल के इतिहास में यह सबसे बड़ी जीत रही. इसी साल बीजेपी ने हरियाणा में फिर जीत हासिल की और महाराष्ट्र में वो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. शिवसेना ने मुख्यमंत्री के सवाल पर बीजेपी से अपना वर्षों पुराना गठबंधन तोड़कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बना ली. लेकिन इसी साल बीजेपी ने ऑपरेशन लोटस के तहत शिवसेना के ही कद्दावर नेता एरकनाथ शिंदे के ज़रिए शिवसेना काे ही हाईजैक करवा दिया. आज शिंदे मुख्यमंत्री हैं लेकिन सत्ता की कमान बीजेपी का हाथों में है.

पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी का विस्तार

कभी सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी कही जाने वाली बीजेपी आज पूर्वी राज्यों पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बाद सबसे बड़ी पार्टी है. 2021 के विधानसभा चुनाव में वो कांग्रेस और वाम दलों का सफाया करके सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनकर अकेले ममता बनर्जी का वर्चस्व को चुनौती दे रही है.

पश्चिम बंगाल का चुनाव बीजेपी ने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम और चेहरे पर ही लड़ा था. वो लाख कोशिशों के बावजूद ममता बनर्जी को सत्ताच्युत करने में तो नाकाम रही लेकिन 77 सीटें जीतकर सबसे बड़ी और एक मात्र विपक्षी दल बन गई. इसी तरह वो ओडीशा में भी नवीन पटनायक की पार्टी के बाद सबसे बड़ी पार्टी है.

उत्तर पूर्व के सभी सातों राज्यों में बीजेपी सत्ता में है. पांच राज्यों में उसके मुख्यमंत्री हैं और दो राज्यों में वो छोटे हिस्सेदार के रूप में सत्ता में हैं.

वर्तमान दौर को बीजेपी का स्वर्णिम दौर कहा जा सकता है

दक्षिण की ओर रुख
दक्षिण भारत बीजेपी का सबसे कमजोर पक्ष है. हालांकि हैदराबाद में हुई बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 2024 के लिए सत्ता में वापसी का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है. इसके लिए बीजेपी ने दक्षिण में दक्षिण भारतीय राज्यों में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. अभी बीजेपी की केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में एक भी सीट नहीं है. पीएम मोदी 2024 में दक्षिण भारत की तरफ से सत्ता में वापसी करना चाहते हैं.

इसी लिए उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को दक्षिण भारतीय राज्यों में पार्टी के विस्तार की अहम ज़िम्मेदारी सौंपी हुई है. अगर वो इसमें कामयाब हो जाते हैं तो ये बीजेपी की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी. जिस बड़ी सोच के साथ मोदी ने मिशन दक्षिण भारत तैयार किया है उसे देखते हुए लगता हो कि उन्हें इसमें कामयाबी मिलेगी.

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी अकेले प्रधानमंत्री हैं जिनकी अगुवाई में लगातार केंद्र में भारी बहुमत से सरकार ने वापसी की है. इसके अलावा उनके नाम और चेहरे पर लड़े गए ज्यादातर राज्यों में बीजेपी ने जीत हासिल की है.

2019 में नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद हुए विधानसभा चुनाव में झारखंड में बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा है. इस साल हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सब जगह बीजेपी ने बाजी मारी है.

खासकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड मिली बड़ी जीत के बाद माना जा रहा है कि बीजेपी देश भर में लंबे समय तक राज करेगी. अमित शाह कई बार कह चुके हैं कि बीजेपी अगले 40-50 साल केंद्र और देश के राज्यों में सत्ता में रहेगी. ये बीजेपी की सबसे बड़ी उपलब्धि है. इसके पीछे पीएम नरेंद्र मोदी की बड़ी सोच का बड़ा जादू ही है.