October 3, 2022
बच्चों के इमोशन्स को इग्नोर करना
माता-पिता को बच्चों का पहला शिक्षक कहा जाता है. हर माता-पिता अपने बच्चे से बेहद प्यार करते हैं. बचपन में बच्चों की मासूमियत भरी हरकतों और बातों पर तो पेरेंट्स को कुछ ज्यादा ही प्यार आता है लेकिन कई बार इसी प्यार के चलते बच्चे काफी जिद्दी हो जाते हैं.

बच्चों को बड़ा करना, उन्हें सही-गलत के बीच फर्क समझाना और सही रास्ते में चलने के लिए प्रेरित करना पेरेंट्स के लिए काफी मुश्किल काम होता है और शायद इन्हीं सब कारणों के चलते पेरेंटिंग को दुनिया में सबसे मुश्किल काम माना जाता है. कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आती हैं जिसमें पेरेंट्स के लिए यह फैसला लेना काफी मुश्किल हो जाता है कि उनके बच्चे के लिए क्या सही है और क्या नहीं.

बच्चे के लिए क्या सही है और क्या नहीं.

जन्म से स्कूल जाने तक का जो समय होता है उसमें बच्चा अपने माता-पिता के साथ सबसे ज्यादा समय बिताता है, इस दौरान माता-पिता बच्चों को कई तरह की चीजें सिखाते हैं और शायद इसी के चलते माता-पिता को बच्चों का पहला शिक्षक कहा जाता है. हर माता-पिता अपने बच्चे से बेहद प्यार करते हैं. बचपन में बच्चों की मासूमियत भरी हरकतों और बातों पर तो पेरेंट्स को कुछ ज्यादा ही प्यार आता है लेकिन कई बार इसी प्यार के चलते बच्चे काफी जिद्दी हो जाते हैं.

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कुछ पेरेंट्स ऐसे भी होते हैं जो बचपन से ही बच्चों के प्रति काफी सख्त रवैया रखते हैं. सख्त रवैया रखने के पीछे माता-पिता की बस यही कोशिश रहती है कि उनके बच्चे गलत दिशा में ना जाएं लेकिन कई बार माता-पिता की ये सख्ती बच्चों की ग्रोथ में रुकावट पैदा करने लगती है. आज हम आपको पेरेंट्स की कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो बच्चों को आगे बढ़ने से और जीवन में कुछ बड़ा करने से रोकती हैं. अगर आप भी इनमें से कोई काम करते हैं तो जरूरी है कि आप उसे रोक दें. आइए जानते हैं पेरेंट्स की उन गलतियों के बारे में –

बच्चों की फीलिंग्स

बच्चों के इमोशन्स को इग्नोर करना- अगर भारतीय पेरेंट्स की बात की जाए तो यहां पर पेरेंट्स बच्चों की फीलिंग्स और उनके इमोशन्स को प्राथमिकता नहीं देते जिस कारण बच्चे भी हीन भावना का शिकार होने लगते हैं. हालांकि जब आप बच्चे के इमोशन्स को इग्नोर करते हैं तो वह तुरंत इस चीज पर रिएक्ट नहीं करते लेकिन ऐसा लगातार करते रहने से वह धीरे-धीरे माता-पिता से दूरी बनाने लगते हैं. इसले अलावा, इस स्थिति में बच्चे भविष्य में माता-पिता से अपनी कोई भी बात शेयर करने से कतराने लगते हैं. क्योंकि उन्हें कहीं ना कहीं ये महसूस होने लगता है कि माता-पिता उन्हें नहीं समझ पाएंगे.

खाने के लिए बच्चों पर दवाब डालना- अक्सर पेरेंट्स बच्चों को जबरदस्ती उन चीजों को खाने के लिए कहते हैं जो उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं होती. हालांकि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलें और वह हेल्दी रहें. लेकिन माता-पिता की किसी चीज को खाने के लिए जबरदस्ती करने की इस आदत के कारण बच्चे बिना मन के ही खाने को खा लेते हैं. आपने तो सुना ही होगा कि जिस काम को बिना मन के किया जाए उसका कोई फायदा नहीं मिलता. उसी तरह से अगर बच्चे को कोई चीज पसंद नहीं है और आप उसपर उसे खाने का प्रेशर डालते हैं तो वह उसके शरीर को लग ही नहीं सकती. इसके लिए जरूरी है कि आप खाने को क्रिएटिव तरह से तैयार करें ताकि बच्चा खुशी-खुशी उसे खा ले.

अनुशासन सीखाने के चक्कर में सजा देना- कई बार पेरेंट्स बच्चों को अनुशासन सिखाने के चक्कर में सजा देते हैं. वैसे तो इसमें पेरेंट्स की भी कोई गलती नहीं होती क्योंकि उनके माता-पिता ने भी उन्हें अनुशासन सिखाने के लिए इसी तरीके का इस्तेमाल किया था लेकिन अब समय बदल चुका है. सजा देने से आपका बच्चा कुछ समय तक तो सही बर्ताव करेगा लेकिन अगर लंबे समय की बात करें तो इससे आपके बच्चे के कॉन्फिडेंस पर बुरा असर पड़ता है. अनुशासन सिखाने के लिए सजा देना बच्चों की मेंटल हेल्थ को बुरा तरह के प्रभावित कर सकता है.

बच्चों को कुछ क्रिएटिव ना करने देना- सिर्फ पढ़ाई-लिखाई और हमेशा किताबों में घूसे रहने से बच्चों का विकास नहीं हो सकता. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा जिंदगी में कुछ अलग और बेहतर करे तो इसके लिए जरूरी है कि आप उसे कुछ क्रिएटिव करने के लिए प्रोत्साहित करें. हो सकता है कि इसी के जरिए आपको बच्चे के अंदर छुपे हुनर का पता चले. जरूरी है कि आप अपने बच्चे के साथ मजेदार गेम्स खेलें.

तुलना करना- अक्सर पेरेंट्स बच्चों को सबक सिखाने के लिए उनकी तुलना दूसरों के बच्चों से करने लगते हैं. कई बार पेरेंट्स अपने बच्चों को नीचा दिखाते हैं और दूसरों के बच्चों की कुछ ज्यादा ही तारीफ करने लगते हैं. अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो बता दें कि इससे आपको कुछ भी हासिल नहीं होगा बल्कि ऐसा करने से आपके बच्चे की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर जरूर पड़ेगा. ऐसा करने से वह खुद को कमतर आंकने लगेगा जो उसकी ग्रोथ में बाधा डाल सकता है.

बच्चे से प्यार एक्सप्रेस ना करना- भारतीय पेरेंट्स की यह आदत काफी कॉमन है कि वह दूसरे के सामने तो अपने बच्चों के लिए प्यार काफी जताते हैं लेकिन जहां बात बच्चों से प्यार को एक्सप्रेस करने की आती है वहां उन्हें शर्म आने लगती है. अगर आप भी अपने बच्चे के आगे अपना प्यार एक्सप्रेस नहीं करते हैं तो इससे आप दोनों के बीच में काफी दूरी आ सकती है.

पैसों का महत्व ना समझाना- बच्चों की फाइनेंशियल ग्रोथ के लिए जरूरी है कि आप उन्हें पैसों और इसके महत्व के बारे में समझाएं. इस बारे में समझाने से बच्चा आगे चलकर फिजूलखर्च से बचेगा और उसे इस बात का पता होगा कि उसे अपने पैसों को किन चीजों पर खर्च करना है.