October 3, 2022
पार्थ और उनकी करीबी अर्पिता
ED ने पार्थ को 23 जुलाई 2022 को छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया था. उस दौरान एजेंसी ने पार्थ और उनकी करीबी अर्पिता के पास से 49.80 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे और 5.08 करोड़ की ज्वैलरी बरामद की थी. ED ने पार्थ चर्टर्जी को गिरफ्तार कर 23 जुलाई से 5 अगस्त तक हिरासत में रखकर टीचर भर्ती घोटाले में पूछताछ भी की थी.

Teacher Recruitment Scam: पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 48.22 करोड़ की संपत्ति अटैच की है.

West Bengal Teacher Recruitment Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) की 48.22 करोड़ की संपत्ति टीचर भर्ती घोटाले में मनी लॉड्रिंग में अटैच की है. अटैच की गई संपत्तियों में 40.33 करोड़ की कीमत के फ्लैट, फार्म हाउस और कोलकाता में पॉश इलाके में जमीन है. इसके अलावा 7.89 करोड़ रुपये की रकम है जो बैंक खातों में जमा है.

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी

पार्थ चटर्जी कर रहे थे इन कंपनियों को कंट्रोल

एजेंसी का कहना है कि अटैच की गई संपत्ति और बैंक बैलेंस फर्जी कंपनियों के नाम पर थे. लेकिन इसका मालिकाना हक पार्थ चर्टर्जी के पास था और सभी लोग पार्थ के कहने पर इन फर्जी कंपनियों को कंट्रोल कर रहे थे.

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अब तक 103 करोड़ की संपत्ति अटैच

ED ने पार्थ को 23 जुलाई 2022 को छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया था. उस दौरान एजेंसी ने पार्थ और उनकी करीबी अर्पिता के पास से 49.80 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे और 5.08 करोड़ की ज्वैलरी बरामद की थी. ED ने पार्थ चर्टर्जी को गिरफ्तार कर 23 जुलाई से 5 अगस्त तक हिरासत में रखकर टीचर भर्ती घोटाले में पूछताछ भी की थी. इस मामले में ED अब तक 103.10 करोड़ की संपत्ति अटैच कर चुकी है.

शिक्षा मंत्री रहते हुए किया बड़ा घोटाला

पार्थ चर्टर्जी पश्चिम बंगाल सरकार में Commerce & Industry, Parliament Affairs and Electronics & IT मंत्री थे और इससे पहले Minister-in-Charge Education थे, जब ये टीचर भर्ती घोटाला किया गया. आरोप है कि पार्थ जब पश्चिम बंगाल सरकार में शिक्षा मंत्री थे तब ग्रुप सी और डी स्टाफ की भर्तियों के अलावा अध्यापकों की भर्तियों में घोटाला किया. इस मामले की जांच कोलकाता हाई कोर्ट ने CBI को करने के लिए कहा था जिसके बाद ED ने सीबीआई में दर्ज मामले के आधार पर मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.